शिव पूजन की श्रेष्ठ विधि – तेरहवां अध्याय

ब्रह्माजी कहते हैं - हे नारद! अब मैं शिव पूजन की सर्वोत्तम विधि बताता हूं। यह विधि समस्त अभीष्ट तथा सुखों को प्रदान करने वाली है। उपासक ब्रह्ममुहूर्त में उठकर…

Continue Readingशिव पूजन की श्रेष्ठ विधि – तेरहवां अध्याय

देवताओं को उपदेश देना – बारहवां अध्याय

नारद जी बोले- ब्रह्माजी ! आप धन्य हैं क्योंकि आपने अपनी बुद्धि को शिव चरणों में लगा रखा है। कृपा कर इस आनंदमय विषय का वर्णन सविस्तार पुनः कीजिए।  ब्रह्माजी…

Continue Readingदेवताओं को उपदेश देना – बारहवां अध्याय

शिव पूजन की विधि तथा फल प्राप्ति – ग्यारहवां अध्याय

ऋषि बोले - हे सूत जी ! अब आप हम पर कृपा कर हमें ब्रह्माजी व नारद के संवादों के अनुसार शिव पूजन की विधि बताइए, जिससे भगवान शिव प्रसन्न…

Continue Readingशिव पूजन की विधि तथा फल प्राप्ति – ग्यारहवां अध्याय

श्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार एवं त्रिदेव को आयुर्बल देना – दसवां अध्याय

परमेश्वर शिव बोले- हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले विष्णु ! तुम सर्वदा सब लोकों में पूजनीय और मान्य होगे । ब्रह्माजी के द्वारा रचे लोक में कोई दुख…

Continue Readingश्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार एवं त्रिदेव को आयुर्बल देना – दसवां अध्याय

देवी उमा एवं भगवान शिव का प्राकट्य एवं उपदेश देना – नवां अध्याय

ब्रह्माजी बोले - नारद! भगवान विष्णु द्वारा की गई अपनी स्तुति सुनकर कल्याणमयी शिव बहुत प्रसन्न हुए और देवी उमा सहित वहां प्रकट हो गए। भगवान शिव के पांच मुख…

Continue Readingदेवी उमा एवं भगवान शिव का प्राकट्य एवं उपदेश देना – नवां अध्याय

ब्रह्मा-विष्णु को भगवान शिव के दर्शन – आठवां अध्याय

ब्रह्माजी बोले- मुनिश्रेष्ठ नारद! हम दोनों देवता घमंड को भूलकर निरंतर भगवान शिव का स्मरण करने लगे। हमारे मन में ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट परमेश्वर के वास्तविक रूप का…

Continue Readingब्रह्मा-विष्णु को भगवान शिव के दर्शन – आठवां अध्याय

विवादग्रस्त ब्रह्मा-विष्णु के मध्य अग्नि-स्तंभ का प्रकट होना – सातवां अध्याय

ब्रह्माजी कहते हैं - हे देवर्षि ! जब नारायण जल में शयन करने लगे, तब शिवजी की इच्छा से विष्णुजी की नाभि से एक बहुत बड़ा कमल प्रकट हुआ ।…

Continue Readingविवादग्रस्त ब्रह्मा-विष्णु के मध्य अग्नि-स्तंभ का प्रकट होना – सातवां अध्याय

ब्रह्माजी द्वारा शिवतत्व का वर्णन – छठा अध्याय

ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! तुम सदैव जगत के उपकार में लगे रहते हो। तुमने जगत के लोगों के हित के लिए बहुत उत्तम बात पूछी है। जिसके सुनने से…

Continue Readingब्रह्माजी द्वारा शिवतत्व का वर्णन – छठा अध्याय

नारद जी का शिवतीर्थों में भ्रमण व ब्रह्माजी से प्रश्न  – पांचवां अध्याय 

सूत जी बोले- महर्षियो ! भगवान श्रीहरि के अंतर्धान हो जाने पर मुनिश्रेष्ठ नारद शिवलिंगों का भक्तिपूर्वक दर्शन करने के लिए निकल गए। इस प्रकार भक्ति-मुक्ति देने वाले अनेक शिवलिंगों…

Continue Readingनारद जी का शिवतीर्थों में भ्रमण व ब्रह्माजी से प्रश्न  – पांचवां अध्याय 

नारद जी का भगवान विष्णु को शाप देना – चौथा अध्याय

ऋषि बोले - हे सूत जी ! रुद्रगणों के चले जाने पर नारद जी ने क्या किया और वे कहां गए? इस सबके बारे में भी हमें बताइए ।सूत जी…

Continue Readingनारद जी का भगवान विष्णु को शाप देना – चौथा अध्याय

नारद जी का भगवान विष्णु से उनका रूप मांगना – तीसरा अध्याय

सूत जी बोले - महर्षियो ! नारद जी के चले जाने पर शिवजी की इच्छा से विष्णु भगवान ने एक अद्भुत माया रची। उन्होंने जिस ओर नारद जी जा रहे…

Continue Readingनारद जी का भगवान विष्णु से उनका रूप मांगना – तीसरा अध्याय

नारद जी की काम वासना – दूसरा अध्याय

सूत जी बोले- हे ऋषियो ! एक समय की बात है। ब्रह्मा पुत्र नारद जी हिमालय पर्वत की एक गुफा में बहुत दिनों से तपस्या कर रहे थे। उन्होंने दृढ़तापूर्वक…

Continue Readingनारद जी की काम वासना – दूसरा अध्याय

ऋषिगणों की वार्ता – पहला अध्याय

जो विश्व की उत्पत्ति, स्थिति और लय आदि के एकमात्र कारण हैं, गिरिराजकुमारी उमा के पति हैं, जिनकी कीर्ति का कहीं अंत नहीं है, जो माया के आश्रय होकर भी…

Continue Readingऋषिगणों की वार्ता – पहला अध्याय

भगवान शिव की पूजा से पाएं कालसर्प दोष की परेशानी से मुक्ति

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो भगवान शिव की पूजा से कालसर्प दोष की परेशानी से मुक्ति मिल सकती है। कालसर्प दोष आपके तमाम कष्टों का कारण बनता…

Continue Readingभगवान शिव की पूजा से पाएं कालसर्प दोष की परेशानी से मुक्ति

भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” के जप से दूर करें सब कष्ट

वेदों और पुराणों के अनुसार शिव अर्थात सृष्टि के सृजनकर्ता को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय”का जप ही काफी है। भोलेनाथ इस मंत्र से बहुत…

Continue Readingभगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” के जप से दूर करें सब कष्ट

कैलाश मानसरोवर

कैलाश मानसरोवर अक्सर भगवान शिव के स्वर्गीय निवास के रूप में लोकप्रिय कैलाश पर्वत अपनी राजसी सुंदरता और मानसरोवर के लिए लोकप्रिय है। झील कैलाश का एक अविभाज्य अंग है।…

Continue Readingकैलाश मानसरोवर